सामान्य लक्षण
- धुंधला या धूमिल दिखना
- रात में रोशनी के चारों ओर चमक
- रंग फीके लगना
- चश्मे का नंबर बार-बार बदलना
हम कैसे इलाज करते हैं
हम फेको (फेकोइमल्सिफिकेशन) और माइक्रो-इंसिजन फेको सर्जरी करते हैं। धुंधला लेंस छोटे चीरे से निकालकर उसकी जगह कृत्रिम लेंस लगाया जाता है। अधिकांश मरीजों में केवल सुन्न करने वाली बूँदें लगती हैं, इंजेक्शन नहीं।
सर्जरी हमारे अपने ऑपरेशन थिएटर में होती है। तरीका, एनेस्थीसिया और लेंस आपकी आँख के अनुसार तय होते हैं।
मुलाकात में क्या होता है
आँख की जाँच
दृष्टि, आँख का प्रेशर और पूरी आँख की जाँच होती है। पुराने चश्मे, रिपोर्ट और दवाओं की सूची लाएँ।
सर्जरी की योजना
सर्जरी से फायदा हो तो लेंस, आपकी जरूरत और खर्च पर बात होती है। सर्जरी की तारीख अलग से तय होती है।
सर्जरी के बाद
बूँदों और दवाओं के लिखित निर्देश और पहली जाँच की तारीख मिलती है।
सामान्य प्रश्न
क्या हर मोतियाबिंद की तुरंत सर्जरी जरूरी है?
नहीं। दृष्टि और रोज़ की जरूरत के अनुसार समय तय होता है। शुरुआती मोतियाबिंद में कभी-कभी नया चश्मा काफी होता है।
क्या ऑपरेशन बिना इंजेक्शन और बिना टाँके के होता है?
अधिकांश मरीजों में केवल बूँदें लगती हैं और छोटा चीरा अपने आप बंद हो जाता है। जाँच के बाद सर्जन तय करते हैं; कुछ आँखों में इंजेक्शन या टाँका लगता है।
मोतियाबिंद ऑपरेशन का खर्च कितना है?
यह लेंस और आपकी आँख पर निर्भर करता है। पूछें कि पैकेज में जाँच, दवाएँ और फॉलोअप शामिल हैं या नहीं।
कौन-सा लेंस सबसे अच्छा है?
सबके लिए एक ही लेंस नहीं होता। पढ़ने, काम और वाहन चलाने की अपनी जरूरत बताएँ; डॉक्टर विकल्प समझाएँगे।
मधुमेह हो तो?
डॉक्टर को बताएँ और रेटिना की रिपोर्ट लाएँ। मोतियाबिंद के साथ रेटिना की भी जाँच होती है।
क्या जाँच के दिन ही ऑपरेशन होगा?
ऐसा मानकर यात्रा न करें। पहले जाँच होती है; सर्जरी की तारीख बाद में तय होती है।
और पढ़ें: National Eye Institute: cataracts (English)
अचानक दृष्टि घटे, तेज दर्द हो या आँख में चोट लगे तो तुरंत आँखों का इलाज लें।